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Dastaan-e-Tamanna-e-Sarfaroshi is based on the Kakori Conspiracy, known as Kakori Episode that happened on August 9, 1925. This musical Dastaan brings to life the political beliefs, courage and the struggle for freedom of the revolutionaries of that time. The Dastaan primarily focuses on Ashfaqulla Khan and Ram Prasad Bismil. Although these revolutionaries came a generation before Bhagat Singh, and greatly inspired him, not much has been done to keep them alive in our history. Ashfaq and Bismil, were not only the main thinkers behind the Kakori Episode, but also shared deep friendship. In India’s National Movement, their friendship was a great example of Hindu-Muslim unity. Both of them were born in the same city and became close friends. Together, they fought the battle for freedom and sacrificed their lives for it. They both dreamt of an India where every one was treated equally and no one was discriminated against on the basis of caste or religion. This Dastaan is a form of a protest in the face of the divisive politics which is tearing at the very fabric of our culture and society. Passionately written and narrated by Himashu Bajpai and woven together with the poetry by Ashfaq and Bismil that has been beautifully set to music and sung by Vedanth Bharadwaj. He is accompanied on tabla by a young talent from the Lucknow gharana, Shivargh Bhattacharya.

दास्तान-ए-तमन्ना-ए-सरफ़रोशी 9 अगस्त 1925 की काकोरी क्रांति जिसे काकोरी कांड भी कहा जाता है, के शहीदों की गौरवगाथा है. ये संगीतमय दास्तान काकोरी के इंकलाबियों की राजनैतिक विचारधारा, उनके साहस और आज़ादी के लिए उनके संघर्ष को सामने लाती है.दास्तान ख़ासतौर पर अश्फ़ाक़उल्ला खां और रामप्रसाद बिस्मिल पर केन्द्रित है. भगत सिंह से पहले वाली पीढ़ी के इन क्रांतिकारियों पर विस्तार से काम नहीं हुआ. जबकि भगत सिंह ख़ुद काकोरी के क्रांतिकारियों से गहराई से मुतासिर रहे. अश्फ़ाक़-बिस्मिल, ये दोनो अमर शहीद काकोरी कांड के मुख्य विचारक थे साथ ही गहरे दोस्त थे. इनकी दोस्ती भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में हिन्दी-मुस्लिम एकता की सबसे बड़ी मिसाल है. दोनो एक शहर में पैदा हुए, गहरे दोस्त बने, मिल कर देशकी आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी और एक साथ जान दी. दोनो का सपना स्पष्ट तौर पर एक ऐसे भारत का था जहां सब बराबर हों और ज़ाति या धर्म के आधार पर किसी तरह का भेद-भाव न होता हो. आज के दौर में जब लोगों को जाति धर्म में बांटने के संगठित प्रयास किए जा रहे हैं तब ये दास्तान एक राजनैतिक प्रतिवाद है इस विभाजनकारी राजनीति के ख़िलाफ़. वेदांत के अश्फ़ाक़ और बिस्मिल की क्रांतिकारी शाइरी को बेहद ख़ूबसूरती से संगीत में ढाला है. तबले पर लखनऊ घराने के प्रतिभावान युवा शिवार्घ होंगे.